देश के नौ राज्यों के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के तिलक हॉल में आज अल्पसंख्यकों के विकास का खाका खींचने के लिए एकजुट हुए. ये सभी अल्पसंख्यक मंत्रियों के इस क्षेत्रीय समन्वय सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मदरसों को बंद करना कोई हल नहीं है, बल्कि उनका आधुनिकीकरण होना चाहिए. उन्होंने कहा कि मदरसों के साथ-साथ संस्कृत विद्यालयों में आधुनिक बनाया जाना चाहिए.
योगी ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्किल डेपलपमेंट प्रोग्राम चलाया गया है. इसके जरिए अल्पसंख्यक समुदाय के लिए कल्याण के कदम उठाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि मदरसों को बंद करना कोई हल नहीं है, बल्कि उन्हें आधुनिक किया जाए. मदरसों को कम्प्यूटर से जोड़ना होगा.योगी आदित्यनाथ ने मदरसों को आधुनिक बनाने के साथ-साथ प्रदेश के संस्कृत स्कूलों को भी आधुनिक बनाने की बात कही.अल्पसंख्यक मंत्रियों के इस क्षेत्रीय समन्वय सम्मेलन अध्यक्षता केंद्रीय अल्पंसख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी करेंगे और इस सम्मेलन का उद्घाटन सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया.
लखनऊ में हो रहे क्षेत्रीय समन्वय सम्मेलन में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, उत्तराखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, सहित नौ राज्यों के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री शामिल हो रहे हैं. इस समन्वय बैठक उत्तर भारत के राज्यों के अल्पसंख्यक मंत्रियों की है. पहली बार उत्तर प्रदेश में सम्मेलन हो रहा है, इससे पहले क्षेत्रीय सम्मेलन दिल्ली में अयोजित होते रहे हैं. उत्तर प्रदेश में हो रही अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रियों के समन्वय सम्मेलन में अल्पसंख्यकों के विकास और कल्याण के लिए चल रही योजनाओं की समिक्षा की जाएगी.इसके अलावा यूपी के सभी जिलों में अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं को लागू करने की घोषणा भी की जाएगी. फिलहाल अभी तक सूबे के महज 41 जिलों में ही अल्पसंख्यक कल्याण योजनाएं लागू है.
इस क्षेत्रीय समन्वय सम्मेलन में मदरसों की शिक्षा को लेकर चर्चा की जाएगी. माना जा रहा है कि मदरसों की शिक्षा के परंपरागत पैटर्न में बदलाव करके इस्लामिक शिक्षा के साथ-साथ सीबीएससी के पाठ्यक्रम और रोजगार शिक्षा पर जोर दिया जाएगा. ताकि मदरसों से निकलने वाले छात्र बेरोजगार न रह सके.इस सम्मेलन पर मुस्लिम महिलाओं से जुड़े तीन तलाक मामले पर भी जोर दिया जा सकता है. सरकार तीन तलाक को लेकर सख्त रैवया अख्तियार किए हुए है. तीन तलाक को पूर्णरूप से प्रतिबंधित करने के लिए सरकार ने तीन तलाक विरोधी विधेयक को लोकसभा से पास हो गया है और राज्यसभा में अटका हुआ है.